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हॉटस्टार पर नंबर 1 ट्रेंड कर रही 'स्पेशल ऑप्स 1.5', निर्देशक नीरज पांडे ने दिया सीजन 2 का हिंट

नई दिल्ली। हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज 'स्पेशल ऑप्स 1.5' खूब पसंद की जा रही है। साल 2020 में इस सीरीज का पहला सीजन 'स्पेशल ऑप्स' नाम से रिलीज हुआ था। जिसके बाद अब इसका दूसरा सीजन 'स्पेशल ऑप्स 1.5' नाम से रिलीज हुआ है। वेब सीरीज को दर्शकों का इतना प्यार मिल रहा है कि रिलीज होते ही सीरीज डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर नंबर 1 पर ट्रेंड कर रही है। जिससे फिल्म की पूरी टीम भी बेहद खुश हैं।

डिज्नी प्लस हॉटस्टार के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से इसे लेकर पोस्ट भी शेयर किया गया है। वेब सीरीज का एक पोस्ट रिलीज किया गया है। जिसमें इसके #1 पर ट्रेंड करने की जानकारी दी गई है।

निर्देशक नीरज पांडे के साथ खास बातचीत

'ए वेडनेसडे' और 'एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' जैसी फिल्मों के निर्देशक नीरज पांडे के निर्देशन में बनी वेब सीरीज स्पेशल ऑप्स 1.5 हाल ही में डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई है। के के मेनन अभिनीत इस शो को लेकर खबरें थी कि इसके बाद शो का तीसरा सीजन आएगा। हालांकि, नीरज ने ऐसी किसी भी संभावना से इन्कार किया है।

दैनिक जागरण से बातचीत में नीरज ने कहा, 'स्पेशल ऑप्स 1.5 की शुरुआत इसके पहले सीजन के रिलीज होने के बाद हुई। शो को दर्शकों से मिलने वाले प्यार को देखकर हम इस फ्रेंचाइजी में कुछ अलग लेकर आना चाहते थे। हमारे सामने दो विकल्प थे, पहला कि हम शो का दूसरा सीजन लेकर आए, जैसा कि सब उम्मीद भी कर रहे थे। दूसरा मेरा मानना था कि चार अलग एपिसोड में सिर्फ हिम्मत सिंह की कहानी लेकर आए। अगर हम साल 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले के आस-पास जाते हैं तो वो भी एक अच्छा तरीका होगा, इस फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाने का।'

आगे नीरज कहते हैं, 'अमूमन ऐसा होता नहीं है, लेकिन यह सुनने के बाद टीम के सभी लोग इस पर काम करने के लिए उत्साहित थे। सब का कहना था कि अगर ये कहानी हम अभी नहीं बोलेंगे तो कभी नहीं बोल पाएंगे। हमारी योजनाओं के मुताबिक इसके बाद सीजन 2 आएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल तक हम स्पेशल ऑप्स 2 लोगों के सामने ले आएंगे।'

संसद हमले जैसे संवेदनशील मुद्दे पर शो बनाने को लेकर नीरज कहते हैं, 'इसमें बहुत ज्यादा सावधानियां नहीं बरतनी पड़ती हैं, चूंकि हम एक कहानी बता रहे होते हैं, जिसमें हमारा कोई छुपा एजेंडा नहीं होता है। एहतियात के तौर पर हमें सिर्फ यही देखना होता है कि उस समय की सच्चाई को ज्यादा से ज्यादा दिखाया जा सके और उनसे कोई छेड़छाड़ न हो।'

 

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